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15वां वित्त आयोग

प्रस्तावना :-

 

पन्द्रहवें वित्त आयोग योजनान्तर्गत आयोग की सिफारिशों के अन्तर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु दिशा-निर्देश जारी किये गये थे। जिनके अतिक्रमण के क्रम में 15वां वित्त आयोग द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट के अध्याय-7 में “स्थानीय शासनों का सशक्तिकरण“ में पंचायती राज संस्थाओं के लिए की गई सिफारिशों के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के लिए निर्धारित किए गए अनुदानों में से, 60 प्रतिषत को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, जैसे कि पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए बन्ध-अनुदान (Tied-Grant) के रूप में निर्धारित किया गया है, जबकि 40 प्रतिषत अनाबद्ध-अनुदान (Untied-Grant) का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं द्वारा मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

 



अनुदान हस्तान्तरण का आधारः-

 


पंद्रहवें वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट अनुसंशित अनुसार षष्टम-राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई नवीनतम कार्यवाही विवरण (ATR) के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत एवं ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत) में राशि का वितरण किये जाने का निर्णय लिया गया है।

 



मूल-अनुदान (Untied Grants):-

  • पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किये जाने वाले कार्यो की सांकेतिक सूची अंकित की गई है। जिसमें 15वें वित्त आयोग के तहत् पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किये जाने वाले कार्यो/गतिविधियों के सांकेतिक मद जिन पर ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा देय 40 प्रतिशत मूल (Untied) अनुदानों का उपयोग किया जा सकेगा ।

बंध-अनुदान (Tied Grants):-

  • बन्ध-अनुदान (Tied-Grant) की 50% राशि का उपयोग क्रमश: (अ) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) की स्थिति और रखरखाव तथा शेष 50% राशि का उपयोग (ब) पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है। हालांकि, अगर किसी भी स्थानीय निकाय ने उक्त (अ) व (ब) में से कोई एक श्रेणी की जरूरतों को पूर्ण कर लिया है, तो वह अन्य श्रेणी के लिए राशि का उपयोग कर सकेगी।
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